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त्याग और बलिदान की प्रतिमूर्ति स्वामी श्रद्धानंद: प्राचार्य मनोज कुमार झा

मुजफ्फरपुर (जनमन भारत संवाददाता)। डीएवी पब्लिक स्कूल खबड़ा में भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले हुतात्मा स्वामी श्रद्धानंद जी के पुण्यतिथि को बलिदान दिवस के रूप में मनाया गया। इसका उद्घाटन प्राचार्य मनोज कुमार झा ने स्वामी श्रद्धानंद की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। प्राचार्य ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद का जन्म 22 जनवरी 1856 में जालंधर के तालबान गांव में हुआ था। उनके बचपन का नाम मुंशीराम बीज था। उन्होंने अनेक सामाजिक कार्य किए और 23 दिसंबर 1926 को उनका निधन हो गया। उन्होंने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की स्थापना की। उन्होंने बच्चों को स्वामी श्रद्धानंद की जीवनी से प्रेरणा लेने और उनके बताए मार्गो पर चलने को कहा। सभा को संबोधित करते हुए अन्य वक्ताओं ने स्वामी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि वह एक महान देशभक्त, विद्या अनुरागी एवं आर्य समाज के सच्चे पथिक थे। जिन्होंने अपने कर्तव्य पथ पर चलते हुए स्वयं को बलिदान कर दिया। स्वामी श्रद्धानंद जी एक महान संत, समाज सुधारक एवं अप्रतिम विद्या अनुरागी थे। जिन्होंने आर्य समाज के पताका को लहराते रहने के लिए स्वयं को आत्मोसर्ग कर दिया। उन्होंने अछूतोद्धार, शुद्धीकरण आदि पर बल देकर सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने पर विशेष बल दिया। आज आवश्यकता इस बात की है कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में जो मापदंड स्थापित किया था। आज हम सभी मिलकर उनके अधूरे सपने को साकार रूप प्रदान करें एवं उनके पद चिन्हों पर चलकर नव भारत के निर्माण में सहयोग करें। यही हमारे उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी सहित बच्चे उपस्थित थे।

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