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मूवी रिव्यू और ट्रैवल ब्लॉगिंग से बनायी पहचान

पटना (जनमन भारत संवाददाता) । किशोरों के साथ ही नये युवाओं के मोबाइल में बॉलीवुड फिल्मों से कहीं अधिक दक्षिण भारत की फिल्में जगह बना रही हैं। हॉलीवुड सिनेमा के प्रति भी इस उम्र के युवाओं की दीवानगी बॉलीवुड सिनेमा से कहीं अधिक है। जल्द ही वह समय आयेगा, जब बॉलीवुड के सिनेमा को साउथ इंडियन मुवीज रिप्लेस कर देंगी।


यह बात 3 वर्ष पूर्व ही रागिब खान ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बता दी थी। कोरोना काल में करीब 2 वर्षों तक सिनेमा हॉल बंद रहे। फिल्मों की रिलीज भी टलती रही। लंबे अंतराल के बाद सिनेमा हॉल खुले। इसके बाद मूल रूप से दक्षिण भारतीय भाषाओं की सिनेमाओं ने हिंदी पट्टी में गदर मचा दिया। लगातार साउथ इंडियन मुवीज ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। पुष्पा, आरआरआर और केजीएफ-2 के रूप में उदाहरण सामने हैं। एकाध हिंदी सिनेमा को छोड़ कर सभी दक्षिण से आयी आंधी में उड़ गये।


पेशे से डिजिटल मार्केटर 26 वर्षीय रागिब खान ने फिल्म जगत और ट्रैवल ब्लॉगिंग में अपनी सशक्त पहचान बनायी है। बिहार के मधुबनी जिले के निवासी रागिब बताते हैं फिल्मों से उनका नाता बचपन से रहा है। उनके 2 ही शौक हैं, एक तो फिल्में देखना और दूसरा नयी जगहों को देखना, वहां घूमना और भाषा-संस्कृति को समझना। इसके लिए उन्होंने शुरू से ही मेहनत की। पैसे जुटाये और पूरे भारत को देखा-समझा।
हिंदी फिल्मों के अलावा रागिब ने लगातार क्षेत्रीय भाषाई सिनेमा और इंटरनैशनल फिल्मों का भी रिव्यू किया है। सीमित संसाधनों और बिना किसी प्रचार-प्रसार के उनके द्वारा किये गये पूर्वाग्रह-रहित रिव्यू सौ प्रतिशत सत्य साबित हुए हैं। इस दौरान रागिब ने हिंदी फिल्म जगत के सितारों यथा इमरान हाशमी, विद्या बालन, ह्रितिक रोशन आदि से मुलाकात की है। दक्षिण भारत के कलाकारों अल्लू अर्जुन, प्रभास, जूनियर एनटीआर आदि से भी उन्होंने भेंट की है। इस भेंट के दौरान उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर कई दस्तावेज बनाये हैं जो भविष्य में संग्रहणीय साबित होंगे।

इन्स्टाग्राम और ट्विटर पर लगातार सक्रिय रागिब खान ने कम्प्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग और मार्केटिंग से एमबीए कर रखा है। पिता रेलवे में स्टेशन मास्टर रहे तो ट्रेनों से घूमने की आदत लगी। मां एक शिक्षिका है, जिन्होंने हमेशा उन्हें एक नयी राह चुनने के लिए प्रोत्साहित किया। पारिवारिक स्तर से कभी भी रागिब खान पर कोई बंदिश नहीं लगायी गयी। इस आजादी का असर यह रहा कि उन्होंने फिल्में हो या दुनिया, सभी को अपनी आजाद नजरों से देखा और समझा। इसका परिणाम उनकी लेखनी और ब्लॉगिंग में भी दिखता है।
रागिब खान बताते हैं कि प्रसिद्ध ब्लॉगर निवेदित गजापति से उन्हें घूमने की प्रेरणा मिली। हिमालय की गोद में घूमना उन्हें काफी पसंद है। वहीं तरण आदर्श को पढ़ कर फिल्मों के बारे में रागिब ने लिखना सिखा। प्रत्येक शुक्रवार फिल्म और वेब सिरीज के रिव्यू वे अपने सोशल मीडिया पोस्ट में डालते हैं, जिसे फिल्म जगत के प्रसिद्ध सितारे भी शेयर करते हैं। वे भविष्य में ब्लॉगिंग इंडस्ट्री में नाम कमाना चाहते हैं। उनका सफर अभी जारी है।

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