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आंखफोड़वा कांड के पीड़ित मरीजों को इंसाफ दिलाने के लिए बिहार सिविल सोसायटी ने सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वाधान में निकाला विरोध मार्च

–विरोध प्रदर्शन में सैकड़ो पीड़ित मरीजों के साथ खुदीराम बोस स्मारक से लेकर आई हॉस्पिटल के मुख्य द्वार से समाहरणालय परिसर तक पदयात्रा करते हुए पहुंचे
–संगठन के प्रतिनिधियों द्वारा बिहार के राज्यपाल के नाम जिलाधिकारी से मिलकर मांग पत्र सौंपा ।
मुजफ्फरपुर (जनमन भारत संवाददाता)। बिहार सिविल सोसायटी , राष्ट्रीय जन जन पार्टी, युवा संघर्ष शक्ति और भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में मुजफ्फरपुर आंखफोरबा कांड में पीड़ित मरीजों को इंसाफ दिलाने की मांग को लेकर विरोध मार्च निकाला गया।
 खुदीराम बोस स्मारक से शुरू विरोध मार्च जुरन छपरा रोड नंबर एक होते हुए आई हॉस्पिटल के मुख्य द्वार पर पहुंचा जहां एक घंटे तक विरोध प्रदर्शन के साथ आम सभा की गई। विरोध मार्च जुरन छपरा होते हुए कच्ची पक्की स्टेशन के रास्ते सदर हॉस्पिटल कंपनी बाग होते हुए समाहरणालय परिसर पहुंचा। जहां कांड के पीड़ित मरीजों के साथ संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ताओं द्वारा सरकार और जिला प्रशासन विरोधी हॉस्पिटल प्रबंधन पर कार्रवाई कराने की मांग एवं पीड़ित मरीजों को मुआवजा सहित इंसाफ दिलाने के लिए जोरदार तरीके से विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए बिहार सिविल सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष आचार्य चंद किशोर पराशर ने कहा कि अगर आई हॉस्पिटल प्रबंधन मरीजों को मुआवजा नहीं देती है तो हम हॉस्पिटल खुलने नहीं देंगे। इसके लिए विरोध प्रदर्शन के साथ काला दिवस मनाया गया। जिला प्रशासन और हॉस्पिटल प्रबंधन को चेतावनी है कि हमारी मांगों को गंभीरता पूर्वक ले और उसे पूरा करें अन्यथा आगे सड़क से सदन तक आंदोलन के लिए हम तैयार हैं । युवा शक्ति के राष्ट्रीय संयोजक युवा नेता अनय राज ने कहा अगर जिला प्रशासन दोषी पदाधिकारी को बचाती है, तो इससे जिले के आम जनमानस में अविश्वास फैलेगा और जो इस कांड से पीड़ित मरीज की बदुआ लगेगी। इस कांड में वैसे पीड़ित मरीज हैं, जिनकी बेटियों की शादी करनी थी। यह अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए रोजमर्रा की जिंदगी में कमाते थे, तब उनका परिवार चलता था। आज उनकी आंख की रोशनी चली गई। उनका आंख निकाल लिया गया और जिला प्रशासन आमानवीय रुख अपनाकर मूकदर्शक बनी हुई है। इस बड़ी घटना पर आई हॉस्पिटल प्रबंधन तानाशाही रवैया के साथ मनमानी कर रही है सरकार की घोषणा के बावजूद अभी तक किसी पीड़ित परिजन को सहायता राशि नहीं मिली है और उल्टा जिला प्रशासन हॉस्पिटल प्रबंधक से मिलीभगत करके हॉस्पिटल शुरू करने के लिए कमेटी बना दिया है। अगर आँखफोरवा कांड के पीड़ित मरीजों को सरकार के द्वारा घोषित मुआवजा राशि एक सप्ताह के भीतर नहीं दी जाती है, तो हमारा संगठन इन मरीजों को इंसाफ दिलाने के लिए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल,  आमरण अनशन की शुरुआत करेगी और जरूरत पड़ी, तो मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के कार्यालय तक प्रदर्शन किया जाएगा । जिला अध्यक्ष मुकेश कुमार ने कहा हमें हॉस्पिटल खोलने से कोई परहेज नहीं है। लेकिन पीड़ित मरीजों को इंसाफ देकर उनका मुआवजा राशि भुगतान करने के बाद हॉस्पिटल खोला जाए अन्यथा हम चुप नहीं बैठेंगे। भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच के जिलाध्यक्ष अमित कुमार मुनमुन ने कहा कि हमारा संगठन इन गरीब पीड़ित को इंसाफ दिलाने के लिए चरणबद्ध आंदोलन चलाएगी। जब तक इंसाफ नहीं मिलेगा हम चुप नहीं बैठेंगे। युवा नेता दीनबंधु क्रांतिकारी ने कहा मुजफ्फरपुर जिले का आंखफोरबा कांड सरकार और शासन प्रशासन के लिए बड़ा कांड है। यह बड़ी लापरवाही स्वास्थ्य विभाग की है। फिर भी जिला प्रशासन बिहार सरकार चुप है। एक सप्ताह के भीतर इस कांड के पीड़ित गरीब मजदूरों को इंसाफ नहीं मिला, तो आगे यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से उग्र रूप लेगा। जिसकी सारी जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी। विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से संजय कुमार , गोलू कुमार प्रदोष ठाकुर, विजय कुमार, रुपेश पांडे , सुमित्रा देवी , ज्योति कुमारी, चानो देवी , कवित्री कुमारी, भूषण चौधरी, वैभव मिश्रा , अनमोल ठाकुर, राजेश कुमार , दिवाकर सिंह, रुदल सिंह , आनंद मोहन, विजय साहनी सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

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