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राजनीतिक जमीन खोने के बाद हताशा के शिकार हैं विनोद कुशवाहा जी: भाजपा

मुजफ्फरपुर (जनमन भारत संवाददाता)। अखिल भारतीय सम्राट अशोक समता परिषद के मुख्य संरक्षक  विनोद कुशवाहा जी अपनी राजनैतिक ज़मीन खोने के बाद आजकल हताशा और निराशा की गर्त में जा चुके हैं,और आज उसी का ये प्रतिफल है कि वे प्रायः समाज और समाजवाद की विचारधारा के विरुद्ध खड़े रहते हैं।उक्त बातें भाजपा के जिला प्रवक्ता सिद्धार्थ कुमार,संचित शाही एवं जिला मीडिया प्रभारी सम्राट कुमार ने सांसद अजय निषाद पर विनोद कुशवाहा द्वारा की गई अमर्यादित टिप्पणी के विरुद्ध संयुक्त रूप से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा।
जिला प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा के सांसद और जन प्रिय नेता सांसद अजय निषाद जी पर अवांछित प्रतिक्रिया विनोद कुशवाहा जी की राजनीतिक हताशा और निराशा का परिणाम है।
वैसे भी विनोद जी हमेशा से पिछड़े और दलितों को समाज के मुख्यधारा से अलग-थलग कर अपनी राजनैतिक रोटी सेकने की जुगत में लगे रहते हैं, उनकी राजनीत का आधार ही विच्छेद करना है और ये उसी का प्रतिफल है जिसके कारण वे जनमत के प्रचंड सहयोग से साढ़े चार लाख से अधिक मतो से जीत कर इतिहास में अपना और अपने क्षेत्र की जनता के सम्मान और स्वाभिमान का अमिट छाप छोड़ने वाले सांसद अजय निषाद जी की जीत को अनुकंपा जैसे तुच्छ शब्दों से अलंकृत कर जनादेश का अपमान करने की धृष्टता कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विनोद कुशवाहा ना तो जाति की राजनीति करते है ना ही जमात की।
उनके अंदर अब नैतिकता और सुचिता का लोप हो चुका है, क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो अप्रैल 2018 में अवैध हथियार व करोड़ो की अवैध संपत्ति  बरामदगी के मामले में वे उक्त भ्रष्ट अधिकारी विवेक कुमार के पक्ष में रैली और धरना नहीं करते।
अगर माननीय मुकेश सहनी और माननीय सांसद अजय निषाद जी के बीच विवाद करा कर श्री कुशवाहा की अपने किसी निजी हित को साधने की मंशा हों तो हमारी सलाह है उन्हें कि पहले उन्हें किसी पार्टी की विधिवत सदस्यता ले लेनी चाहिए।
वैसे अब समय आ गया है कि श्री कुशवाहा को अपनी अर्थहीन राजनीति को यहीं विराम देकर आत्मशुद्धि के प्रयास में लग जाना चाहिए,राजनीत से सन्यास लेकर घर-गृहस्थी के कार्यों में जुटने का उनके लिए इससे उपयुक्त अवसर और कोई नहीं हो सकता।

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